खैरागढ़ अपडेट/खुमेश रजक–खैरागढ़–छुईखदान मुख्य मार्ग की हालत दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। सड़क पर जगह-जगह बने बड़े-बड़े गड्ढे और रात के समय पर्याप्त स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं होने से रोजाना छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर अब तक कई लोग गिरकर घायल हो चुके हैं, जबकि स्कूली बच्चे और दोपहिया वाहन चालक सबसे अधिक जोखिम का सामना कर रहे हैं।

ढिमरिनकुँआ से छुईखदान मार्ग यह कोई सामान्य सड़क नहीं है, बल्कि राजनांदगांव, खैरागढ़, कवर्धा के साथ-साथ मध्य प्रदेश के मंडला,जबलपुर सहित कई प्रमुख शहरों को छत्तीसगढ़ से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। इसके बावजूद सड़क की जर्जर स्थिति और मूलभूत सुविधाओं की कमी यात्रियों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बनी हुई है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद संबंधित विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। सड़क की मरम्मत और प्रकाश व्यवस्था की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। इससे लोगों में विभाग की कार्यशैली को लेकर नाराजगी बढ़ रही है।बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत और लाइट की व्यवस्था नहीं की गई, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या संबंधित विभाग किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा, या फिर लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तत्काल सड़क की मरम्मत और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएगा या फिर अभी भी गहरी नींद में सोते रहेगा।

लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता (EE) पदम सिंह दीवान ने बताया कि जिले में जहां-जहां सड़क पर गड्ढे बने हैं, वहां अस्थायी रूप से गिट्टी डालकर उन्हें भरा जा रहा है। वहीं खैरागढ़–छुईखदान मार्ग की बदहाल स्थिति को लेकर उन्होंने कहा कि बारिश के कारण जहां-जहां डामर उखड़ गया है और गड्ढे बन गए हैं, वहां मौसम साफ होते ही मरम्मत कार्य शुरू कराया जाएगा। उनके अनुसार, जैसे ही बारिश कम होगी और मौसम अनुकूल होगा, सड़क की मरम्मत का कार्य तत्काल शुरू कर दिया जाएगा।

हालांकि, सबसे बड़ा सवाल अब भी बरकरार है कि क्या संबंधित विभाग को इस महत्वपूर्ण मार्ग की जर्जर स्थिति की पहले से जानकारी नहीं थी? क्या विभाग किसी शिकायत का इंतजार कर रहा था, या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही कार्रवाई की जाती? जिस सड़क से प्रतिदिन हजारों लोग गुजरते हैं और जहां लगातार छोटी-बड़ी दुर्घटनाओं की खबरें सामने आ रही हैं, वहां समय रहते स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया? अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग अपने दावे के अनुसार मरम्मत कार्य आखिर कब शुरू करता है और सड़क को सुरक्षित बनाने की दिशा में कितनी तेजी से कदम उठाए जाते हैं।

