अब “राजकुमारी इन्दिरा सिंह कला एवं संगीत विश्वविद्यालय” के नाम से जाना जाएगा खैरागढ़ विश्वविद्यालय
खैरागढ़ अपडेट/खुमेश रजक–इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन प्रस्ताव को राज्य शासन से स्वीकृति मिल गई है। लंबे समय से चल रही प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब विश्वविद्यालय का नया नाम आधिकारिक रूप से लागू किए जाने का रास्ता साफ हो गया है। अब विश्वविद्यालय को “राजकुमारी इन्दिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय” के नाम से जाना जाएगा।
जानकारी के अनुसार, माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति के सुझाव पर विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू की गई थी। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विश्वविद्यालय की मूल पहचान तथा संस्थापक राजपरिवार के योगदान को सम्मानपूर्वक संरक्षित करने के उद्देश्य से यह पहल की गई।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) लवली शर्मा के निर्देशन में प्रशासन ने सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करते हुए शासन को प्रस्ताव भेजा था। शासन द्वारा मांगे गए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने के बाद प्रशासनिक स्तर पर परीक्षण किया गया और अंततः नाम परिवर्तन प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
बताया जा रहा है कि इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य खैरागढ़ राजपरिवार की दानशीलता, कला संरक्षण और शिक्षा के क्षेत्र में उनके ऐतिहासिक योगदान को स्थायी पहचान देना है। साथ ही नई पीढ़ी को विश्वविद्यालय की गौरवशाली विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने की दिशा में भी इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राजा आर्यव्रत सिंह ने जताया आभार
यह नाम खैरागढ़ राजघराना के राजा आर्यव्रत सिंह जी के यथक प्रयासों से भी पूर्ण हो पाया,जिसमें उनके लगातार प्रयासों का यह परिणाम है कि अब उनके पूर्वजों द्वारा दी गई दानशीलता का यह महल और विश्वविद्यालय जो अब पूरी दुनिया में राजकुमारी इन्दिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय के नाम से जानता जाएगा और पहचाना जाएगा, राजा आर्यव्रत सिंह एवं राजपरिवार के सदस्यों ने शासन प्रशासन और विश्वविद्यालय परिवार के प्रति आभार भी जताया है।
उल्लेखनीय है कि खैरागढ़ स्थित यह विश्वविद्यालय देश-प्रदेश के प्रमुख कला एवं संगीत शिक्षण संस्थानों में शामिल है, जहां से अनेक कलाकार, संगीतज्ञ और सांस्कृतिक प्रतिभाएं तैयार हुई हैं।कुलपति प्रो. (डॉ.) लवली शर्मा ने शासन की स्वीकृति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय संस्थान की गौरवशाली परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और संस्थापक परिवार के योगदान को स्थायी सम्मान प्रदान करेगा।

